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संघर्ष

August 11, 2018

 

 

संघर्ष करता हूं

 

जिन्दगी तो मुसाफिर है,

गुजरता हुआ पल उसकी राह,

सपने मंजिल है।

मंजिलों का पथ हो जैसे हिमालय पर्वत,

उस ऊंचाई को छुने का साहस करता हूं,

मैं संघर्ष करता हूं।

 

जब राह देख हदय कांप उठती है,

करता हूं उस दिन का एहसास

कि मेरे भी नाम होंगे,

जब मेरी मेहनत गरीबों में दान होंगे।

भुखे बच्चों का पेट भरेगा,

तब जाकर इस दिल को चैन मिलेगा,

उस चैन की चिन्ताओ में जिद करता हूं,

मैं संघर्ष करता हूं।

 

मैं उस देश का वासी हूं,

जहां भुखो का मेला है,

तो कहीं खाने की बरबादी,

ये देख आंख भरता हूं,

मैं संघर्ष करता हूं।

 

खुद को बर्बाद करता हूं,

भुखो के लिए अपनी जीवन दान करता हूं,

मैं संघर्ष करता हूं।

मैं संघर्ष करता हूं।।।

 

By Adarsh

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