चांद और चांदनी

August 11, 2018

 

 

 

 

 

 

चांद और चांदनी

 

एक दिन चांद और चांदनी कि मुलाकात हो गई।

 

चांद चांदनी कि आंखों में खो गया,

रुप देखते ही चांदनी का फिदा हो गया।

 

फिजाओं का रूख बदल रहा था,

चांद चांदनी में ढल रहा था।

 

दिल में चांद  के  मुहब्बत का सैलाब उमड़ रहा था,

वह चांदनी से ब्याह रचाने का ख्वाब गढ़ रहा था।

 

तभी चांद ने चांदनी से कहा- 

 

चांदनी हर कोई तुम्हारा दिदार करता है,

हर कोई तुम‌ पर मरता है।

क्या तुम भी पे मरती हो,

सच कहना, क्या तुम भी किसी से प्यार करती हो।

 

चांद कि बात सुनकर चांदनी जोर-जोर से हंसने लगी,,, बोली,

 

सुरज मरता है मुझपे,

सितारों का जमघट लगा पड़ा है।

पर क्या करूं,,,,,,,

दिल में कोई आता ही नहीं,

सच कहूं कोई भाता ही नहीं।

 

तभी, चांद चांदनी से पुछा-

 

सुन क्या याद करके मुझको,

तुम्हारे दिल कि धड़कन बढ़ जाती है।

क्या पलकें भीगती है तुम्हारी,

क्या आंखों में नमी छा जाती है।

चांदनी सच कहता हूं,,,,

पिछे मैं तेरे पड़ना तो चाहता हूं,

किस्सा मुहब्बत का गढ़ना तो चाहता हूं,

पर डरता हूं,,,,,

हकिकत पता चलने पर क्या जवाब दोगी,

न जाने रहोगी साथ मेरे या फिर त्याग दोगी।

 

तभी चांदनी बोली:-

 

वैसे भी मैं जिससे मुहब्बत करूंगी,

लाखों में एक होगा,

काया उसकी गजब ढऐगी,

जब भी वह मेरे साथ चलेगा,

ज़माने में आग लग जाएगी।

ख्वाबो का राजकुमार होगा वह मेरे,

घर डोली लेके आयेगा,

क्या रूप का बखान करूं उसके,

न चेहरे पर दाग, लम्बा कद चौड़ा सीना,

सुनहरी जूल्फे, झील सी गहरी आंखें,

और आंखों में बस मेरे लिए प्यार।

 

यह सब सुनकर चांद को चांदनी का पाने का इरादा ही टूट गया,

सपने भी टूट गए बेचारे के,

दिल भी टूट गया,

उठ खड़ा होकर चांदनी से बोला:-

 

अच्छा चांदनी चलता हूं,

फिर नहीं मिलूंगा।

कहकर चल पड़ा बेचारा।

 

तभी चांदनी बोली :-

रुक व चांद, कहां जाता है,

क्या हुआ, क्यों रोता है।

बड़े महंगे हैं तेरे आंसु क्यों खोता है।

 

चांद बोला:-

 

क्या करूं चांदनी तुझसे बड़ा प्यार करता हूं,

दिल और जान से तुम पर मरता हूं,

पर तुम तो शायद कुछ और ही चाहती हो।

 

चांद कि बात सुनकर चांदनी मुस्कूरा गई। बोली:-

 

व चांद क्या बकवास करता है,

क्या लगता है, क्या सिर्फ तू ही मुझपे मरता है।

बता ऐसी कौन सी रात होती है,

जिस दिन ये चांदनी किसी और के साथ होती है।

पगले, पल पल बस तेरा ही ख्याल होता है।

 

तभी चांद बोला:- 

 

प्यार करता हूं तुझको पर कह नहीं पा रहा हूं,

सच कहूं चांदनी तेरे बिना रह नहीं पा रहा हूं।

मेरी मुहब्बत का तुझपे कूछ ऐसा असर हो जाए,

जिन्दगी खुशनुमा, सुहाना ये सफर हो जाए।

पर डर रहा हूं चांदनी, कहीं तू मुझसे छूट न जाए,

कांच के सपने मेरे, कहीं टूट न जाए।

 

चांदनी बोलती है:- 

 

अरे व पागल,

कभी देखा है घुमाते मुझे किसी और के साथ,

क्या कभी संग सितारों के पाया है।

सच कहती है तेरी चांदनी, जब भी आंखें बंद की है,

बस तेरा ही ख्याल आया है।

मांग क्या, मांगता है,

आज ये चांदनी सब तेरे हवाले कर देगी,

जान भी मांगनी हो तो मांग लेना,

चांदनी अपना कलेजा निकाल कर रख देगी,

 

चांदनी बस तेरी है तेरी,

तुझसे जूदा नहीं हो सकती,

तु‌ ही बता, तुझसे जूदा होकर तेरी  चांदनी कैसे रह सकती है।

कैसे रह सकती है।।।।

 

By Adarsh

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