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कोई साथ चले

August 11, 2018

ये चाँद बङा निराला है, 

उल्टा रखा कोई प्याला है, 

है प्यास बहुत पर जगह नहीं, 

हसने रोने की वजह नहीं, 

कहता है हर दिन सांझ ढले, 

कोई साथ चले...!!

 

या है ये कोई दीवार घङी, 

जाके तारों से दूर खङी, 

देखे उनकी अठखेली को, 

बूझे समय की पहेली को, 

सपना मन में दिन रात पले. 

कोई साथ चले...!!

 

आधा पूरा कभी दिखे नहीं, 

बावरा है कहीं टिके नहीं, 

ये सोच के रंग बदलता है, 

कभी ढलता और निकलता है, 

कि कभी अमावस रात ढले. 

कोई साथ चले...!!

by Nagmeet

 

 

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