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*बस बात ही कि गई*

August 10, 2018

आज से तकरीबन एक हफ्ते  पहले पूरी दुनिया मे अंतरास्ट्रीय महिला दिवस की बात बड़े ही जोश और खरोश के साथ की गई । बात करने की वजह कुछ लोगो के लिए अपने सामाजिक दायित्वो को निभाना और कुछ लोगो के लिए सोशल मीडिया महोत्सव था खैर जिन्होंने इसके बारे में दिल से बात की उनकी तारीफ भी होनी चाहिए ,क्योंकि ऐसे लोग अक्सर दरकिनार कर दिए जाते हैं । दिल से बताऊ तो मुझे बहुत दुख हुआ कि उस दिन महिलाओ को ले कर इतनी सारी बात की गई । दुख इस बात का नही की बात की गई, दुख इस बात का की बस बात ही कि गई।इस दिन हममें से शायद कोई भी ऐसा नही होगा जसने महिलाओ के हितों के बारे में बात नही की होंगी ।मुझे पूरा विश्वास है कि, अपने भी इसके बारे में बात जरूर की होगी ।अपने स्कूल ,कॉलेज, ऑफिस और अगर यहाँ मौका नही मिला होगा तो सोशल मीडिया पर तो जरूर की होगी लेकिन सोचने वाली बात यह है ,  जब हम महिलाओ के हितों और अधिकारों के बारे में इतना सोचते हैं तो फिर वो लोग कौन होते हैं जो हर चौदह  मिनट में एक रेप जैसे आकड़ो में अपना योगदान करते है समझ नही आता अब  सुरक्षा की जिम्मेदारी और शिकायत अर्ज़ी दे भी तो  किसको, जब हर दो दिन में एक रेप पुलिस कस्टडी में हो जाये और हर तेरह घंटे में एक बलात्कारी करीबी ही हो। तो फिर  ताज्जुब है ...बात किसने की और किससे की ।...आपको याद होगा निर्भया गैंग रेप और लक्ष्मी एसिड अटैक के बाद सड़क से ले कर संसद और सोशल मीडिया से लेकर ग्लोबल मीडिया तक महिलाओ के अधिकारों और सुरक्षा के बारे में बात की गई पर अफसोस आज फिर भी आठ महीने की बच्ची तक  का रेप हो जाता है तो मुझे दुख है कि बात की गई ,दुख इस बात का नही की  बात की गई , दुख इस बात का की बस बात ही की गई।अब दोष दे भी तो किसको जब पिता पुत्र को कहे तू लड़की नही जो सिर झुकाए खड़ा है ,तू लड़की नही जो किसी से डर जाए ,जैसे डरने और सिर झुकने का जिम्मा लड़कियो ने ही संभाल रखा है। और जब भी महिलाओ के मान सम्मान और उत्थान की बात की गई, अरक्षण पहला वैकल्पिक रास्ते की तरह देखा गया । तो क्या किसी को मान- सम्मान, सुरक्षा और बराबरी का हक़ देने का मतलब आरक्षण होता है?... खैर ये तो वही बात हो गई कि जब कोई सुपर स्टार कहता है कि आप यह वाली क्रीम लगाइए और मेरे जैसे हो जाइए अजी सुपर स्टार तो आप अपने कर्मो की वाजे से हैं ना के इस क्रीम की वजह से , मान सम्मान बराबरी वाला एहसास तो लोगो के दिलो दिमाग से होगा। अफसोस है बात भी की गई तो ऐसी ही कि गई ।जब ऐसी ही बात की गई तो फिर बात ही क्यों कि गई।

 -आशुतोष सिंह

 

 

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