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धूप

August 6, 2018

 

कोई बर्फीली आँख, या ठंडी बात,

जब जमाती है मुझे

ठिठुराती है मुझे,

सिहराती है मुझे,

मैं....सेंक लेती हूँ,

मुझे विरसे में मिली धूप....

और पिघल जाती हूँ...

संभल जाती हूँ,

ये सेंक औरों तक भी पहुंचे,

ध्रुव के ठंडे छोरों तक भी पहुंचे,

इतनी सी चाह महज है..... जो सहज है....!!

 

- लेखिका - नगमीत

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