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ख्वाईशे

August 6, 2018

 

ख्वाईशे

 


(एक लड़की की नज़र से)

मेरी ख्वाईशे किसी ने पूछी नहीं कभी l
जब इस दुनिया मे आने वाली थी t
माँ की ख्वाईश थी कि मैं बच जाऊँ l
सब मुझे मार डालना चाहते थे l
जब पैदा हुयी l
माँ की ख्वाईश थी खुशियां मनायी जाये l
सबने मातम मनाया l
बचपन में l
मेरी ख्वाईश थी कि मैं भी पड़ाई करूँ l
सबने मुझे कमरे मे बंद कर दिया l
भाई को देखती l
तो मेरी भी ख्वाईश होती बाहर खेलने की l
बचपन के प्यारे खेल l
मुझे घर घर खेलने को कहा गया l
चूल्हा चौका सिखाया गया l
मन करता मैं भी घूमने जाऊँ, सजने की, सवरने की ख्वाईश होती l
रेप और लूटती हुयी अस्मिता की कहानियां सुना कर मुझे डराया गया l
बड़ी हुयी l
ख्वाईश थी कि होगा मेरा भी एक राजकुमार l
प्रेम की परिभाषा के नाम पर पति से परिचय कराया गया l
पति ही परमेश्वर है l
यही सिखाया और बताया गया l
ख्वाईश थी कि पति की सपनो की रानी बनूंगी l
सास को माँ का दर्ज़ दूँगी l
पर ससुराल में तो मैं बस मुझे फ़र्निचर समझा जाता l
जिसपर दहेज़ की सुंदरता भी नहीं थी l
अब मैं माँ हूँ
एक बेटी की माँ l
ख्वाईश है कि वो ऐसे दिन ना देखे l
कभी नहीं l

 

#Rajiv #RandomThoughts #राजीव

 

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