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August 13, 2018

जीवन के लगभग पचास पतझडो को देख चुकी हू   पतझङ क्यू कह रही हू?    क्यूकि पतझङ के बिना तो बसंत कभी आया नही     लेकिन पता नही क्यो इतनी महत्वपूर्ण बात को किसी ने कभी समझाया ही नही खैर,  इतने पतझङो और बसंतो के दौरान मैने  पाया कि तमाम कवियो, लेखको और साहित्यकारो ने हमेशा ह...

August 11, 2018

एक *आलस* भरी चाय,

एक देखी हुई *फिल्म* !

एक सुस्त *झपकी* ,

एक *अधपढी* किताब में गुजर गया!!

एक हफ्ते किश्त भर कर 

ख़रीदा था *इतवार*...

अभी तो आया था...

ना जाने किधर गया...??

--विजय सहगल

August 11, 2018

कविता 

जंगल में दफ्तर 

चश्मा टांगा, टाई लगायी,                      

पहना सूट सफारी ।                      

कुर्सी-मेज बिछाकर,...

August 11, 2018

चांद और चांदनी

एक दिन चांद और चांदनी कि मुलाकात हो गई।

चांद चांदनी कि आंखों में खो गया,

रुप देखते ही चांदनी का फिदा हो गया।

फिजाओं का रूख बदल रहा था,

चांद चांदनी में ढल रहा था।

दिल में चांद  के  मुहब्बत का सैलाब उमड़ रहा था,

वह चांदनी से ब्याह रचाने का ख्वाब गढ़ रहा था।

त...

August 11, 2018

संघर्ष करता हूं

जिन्दगी तो मुसाफिर है,

गुजरता हुआ पल उसकी राह,

सपने मंजिल है।

मंजिलों का पथ हो जैसे हिमालय पर्वत,

उस ऊंचाई को छुने का साहस करता हूं,

मैं संघर्ष करता हूं।

जब राह देख हदय कांप उठती है,

करता हूं उस दिन का एहसास

कि मेरे भी नाम होंगे,

जब मेरी मेहनत गरीबों में दान होंग...

August 11, 2018

ये चाँद बङा निराला है, 

उल्टा रखा कोई प्याला है, 

है प्यास बहुत पर जगह नहीं, 

हसने रोने की वजह नहीं, 

कहता है हर दिन सांझ ढले, 

कोई साथ चले...!!

या है ये कोई दीवार घङी, 

जाके तारों से दूर खङी, 

देखे उनकी अठखेली को, 

बूझे समय की पहेली को, 

सपना मन में दिन रात पले. 

कोई साथ चले...!...

August 10, 2018

यहाँ इंसानों को न्याय नहीं मिलता तो उस बकरी को क्या मिलेगा ।अब यह भी है बकरी के लिए न्याय मांगे भी तो कौंन 2019 के चुनावों में बकरियां वोट देने थोड़ी जायँगी। खैर सवाल उनसे नही है जो वोट के लिए न्याय मांगते है। सवाल हमसे है कि वोट के लिए न्याय मांगने वालों को मौका देते ह...

August 10, 2018

आज से तकरीबन एक हफ्ते  पहले पूरी दुनिया मे अंतरास्ट्रीय महिला दिवस की बात बड़े ही जोश और खरोश के साथ की गई । बात करने की वजह कुछ लोगो के लिए अपने सामाजिक दायित्वो को निभाना और कुछ लोगो के लिए सोशल मीडिया महोत्सव था खैर जिन्होंने इसके बारे में दिल से बात की उनकी तारीफ भी...

August 10, 2018

गर मिल जाए ख़ुु़दा तो एक दुआ माँग लुं, 

खुल के जीने का ज़रा एहसाहस माँग लुं...

उड़ जाऊँ बिना मंजिल के, न आऊँ किसी के हाथ,

खुद को कर दुँ आज़ाद दो पंख माँग लुँ... 

सराब सी जिंदगी हर पल, है बड़ी बेरगं, 

अास्मॉ का वो नीला रंग माँग लुँ, 

खुद को कर दुँ अजाद दो पंख माँग लुँ...

चिख़त...

August 6, 2018

ख्वाईशे


(एक लड़की की नज़र से)

मेरी ख्वाईशे किसी ने पूछी नहीं कभी l
जब इस दुनिया मे आने वाली थी t
माँ की ख्वाईश थी कि मैं बच जाऊँ l
सब मुझे मार डालना चाहते थे l
जब पैदा हुयी l
माँ की ख्वाईश थी खुशियां मनायी जाये l
सबने मातम मनाया l
बचपन में l
मेरी ख्वाईश थी कि मैं भी पड़...

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